संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक दुनिया की कुल आबादी का 49.6 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। साल 2011 में हेल्थ केयर वीमेन इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि दुनिया के श्रम विभाग में महिलाओं की दो-तिहाई हिस्सेदारी है, लेकिन इसके विपरीत उनकी आमदनी कुल आय की केवल 

10 फीसद ही है। इस डेटा में घरेलू कामकाज में लगी महिलाओं को शामिल नहीं किया गया है।

दुनिया की आबादी का इतना बड़ा हिस्सा होने और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद महिलाओं को उस प्रकार से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाईं, जिनकी वे ​वास्तविक हकदार थीं। महिला और पुरुष व्यवहारिक और शारीरिक दृष्टि से अलग हैं। इसका अर्थ है कि महिलाओं की आवश्यकताओं को कई सामाजिक पहलुओं पर वन साइज फिट ऑल के आधार पर पूरा नहीं किया जा सकता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य के मुद्दों को बेहतर तरीके से समझा जाना चाहिए, क्योंकि उनका अच्छा स्वास्थ्य (या इसकी कमी) मनुष्यों की अगली पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है, खासकर तब जब पुरुषों से इतर महिलाओं को विशष रूप से कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।