गर्दन का दर्द, गर्दन की मांसपेशियों, हड्डियों, हड्डियों के बीच की डिस्क, या नसों के ऐंठन का परिणाम हैं। गर्दन की मांसपेशियाँ गलत अंग-विन्यास में बैठने या कंप्यूटर पर लगातार काम करने या कार्यक्षेत्र में लगातार देर तक काम करने से, गर्दन में ऐंठन आने के कारण होती हैं। कुछ रोग व्यक्ति के, गर्दन के दर्द को और उत्तेजित करते हैं। कुछ शारीरिक गतिविधियां या दुर्घटनाएं भी गर्दन में दर्द उत्पन्न कर सकती हैं। गर्दन का दर्द, सामान्य रूप में, किसी गंभीर अवस्था को नहीं दर्शाता हैं। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति की बाहों में सुन्नता या हाथों में तीव्र दर्द उठता हैं तब उसे डाक्टर से परामर्श करना चाहिये।

गर्दन में दर्द के कारण

गर्दन में दर्द के कई कारण होते हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

मांसपेशियों में तनावः लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने से गर्दन में दर्द होना सबसे आम कारण हैं। अधिकांशत: पढ़ते समय, टेलीविजन देखने के समय गलत अवस्था में बैठने से, गर्दन में अकड़न और दर्द होता हैं। कभी-कभी व्यायाम करते समय, गलत स्थिति में सोने से या अचानक गलत ढंग से मुड़ने से भी गर्दन की मांसपेशियों में ऐंठन आ जाती हैं और व्यक्ति दर्द से पीड़ित हो जाता हैं।

गठियाः स्पोंडिलोसिस या सर्वाइकल आर्थिराइटिस के कारण गर्दन में अकड़न और दर्द होता हैं। स्पोंडिलोसिस मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोत्तरी और वर्टेब के बीच के कुशन के अपने स्थान से सरकने और घिस जाने की वजह से होता हैं। आम तौर से यह खिलाड़ियों में देखा जा सकता हैं।

स्पाइनल स्टेनोसिस/मेरूदंड संकुचनः जब मेरूदंड की नालिका संकरी हो जाती हैं, तब गर्दन में दर्द होता हैं। इसी प्रकार, रीढ़ की हड्डी में संक्रमण जैसे अंतर मेरूदंडीय डिस्क, अस्थिमज्जा के प्रदाह के कारण भी गर्दन में दर्द होता हैं।

फाइब्रोम्याल्जिया: फाइब्रोम्याल्जिया के रोगी मांसपेशियों, जोड़ों और पट्ठों के दर्द से ग्रस्त होते हैं। गर्दन का दर्द फाइब्रोम्याल्जिया के लक्षणों में से एक हैं।


गर्दन के दर्द के लिए घरेलू उपचार

ठंडी या गर्म पट्टियां: हल्के गर्दन दर्द के, शुरू के 48 से 72 घंटों में, ठंडी पट्टियां लगा सकते हैं। ठंडी पट्टियों के बाद, गर्म पट्टी लगाये या गर्म पानी से स्नान भी कर सकते हैं।

दर्द नाशक दवाएं: गर्दन की सूजन कम करने के लिए आप एसिटामिनोफेन जैसी दवाएं इस्तेमाल कर सकते हैं। विशेष रूप से इबुप्रोफेन दर्द नाशक, का बहुत ज्यादा उपयोग नहीं करना चाहिये, क्यूंकि इससे पेट और ग्रहणी का अल्सर हो सकता हैं।

व्यायामः सिर को दोनो तरफ या ऊपर और नीचे की ओर मोड़ने या गर्दन को हलका घुमाने पर गर्दन की मांसपेशियों के व्यायाम से मदद मिलती हैं।